Verses on the Recognition of the Lord· 14.9 / 20

Verses on the Recognition of the Lord14.9

14.9
बोधानाम् अपि कर्तृत्वजुषां कार्ममलक्षतौ भिन्नवेद्यजुषां मायामलो विद्येश्वराश् च ते ॥९॥
bodhānām api kartṛtvajuṣāṃ kārmamalakṣatau bhinnavedyajuṣāṃ māyāmalo vidyeśvarāś ca te
— बोध-स्वरूप (ज्ञानियों) के ; — भी ; — कर्तृत्व से युक्त (ज्ञानियों) के ; — कार्म मल के क्षीण होने पर ; — भिन्न वेद्यों (विषयों) के भागी (ज्ञानियों) के ; — माया मल (शेष रहता है) ; — विद्येश्वर (ज्ञान के स्वामी) ; — और ; — वे

जो बोध-स्वरूप, कर्तृत्व से युक्त होते हुए भी, जिनका कार्म मल क्षीण हो गया है, किन्तु जो अभी भी भिन्न वेद्यों (विषयों) के भागी हैं — उनमें केवल माया मल (रहता है); और वे विद्येश्वर हैं।