बोधानाम् अपि कर्तृत्वजुषां कार्ममलक्षतौ
भिन्नवेद्यजुषां मायामलो विद्येश्वराश् च ते ॥९॥
bodhānām api kartṛtvajuṣāṃ kārmamalakṣatau
bhinnavedyajuṣāṃ māyāmalo vidyeśvarāś ca te
— बोध-स्वरूप (ज्ञानियों) के; — भी; — कर्तृत्व से युक्त (ज्ञानियों) के; — कार्म मल के क्षीण होने पर; — भिन्न वेद्यों (विषयों) के भागी (ज्ञानियों) के; — माया मल (शेष रहता है); — विद्येश्वर (ज्ञान के स्वामी); — और; — वे
जो बोध-स्वरूप, कर्तृत्व से युक्त होते हुए भी, जिनका कार्म मल क्षीण हो गया है, किन्तु जो अभी भी भिन्न वेद्यों (विषयों) के भागी हैं — उनमें केवल माया मल (रहता है); और वे विद्येश्वर हैं।