Verses on the Recognition of the Lord· 14.8 / 20

Verses on the Recognition of the Lord14.8

14.8
शून्याद्यबोधरूपास् तु कर्तारः प्रलयाकलाः तेषां कार्मो मलो ऽप्य् अस्ति मायीयस् तु विकल्पितः ॥८॥
śūnyādyabodharūpās tu kartāraḥ pralayākalāḥ teṣāṃ kārmo malo 'py asti māyīyas tu vikalpitaḥ
— शून्य आदि अबोध-रूप (होते हुए) ; — किन्तु ; — कर्ता ; — प्रलयाकल — प्रलय में पृथक् स्थित ; — उनका ; — कार्म मल ; — भी ; — है (√अस्) ; — मायीय (मल) ; — किन्तु ; — विकल्पित (केवल संस्कार-रूप, अव्यक्त) (भूत कृदन्त)

किन्तु जो शून्य आदि अबोध-रूप होते हुए भी कर्ता हैं, वे प्रलयाकल हैं; उनमें कार्म मल भी है, किन्तु मायीय (मल) केवल विकल्पित (अव्यक्त, संस्कार-रूप) रहता है।