Verses on the Recognition of the Lord· 14.7 / 20

Verses on the Recognition of the Lord14.7

14.7
बोधैकलक्षणैक्ये ऽपि तेषाम् अन्योन्यभिन्नता तथेश्वरेच्छाभेदेन ते च विज्ञानकेवलाः ॥७॥
bodhaikalakṣaṇaikye 'pi teṣām anyonyabhinnatā tatheśvarecchābhedena te ca vijñānakevalāḥ
— (यद्यपि उनके) एकमात्र लक्षण बोध में एकता है ; — भी ; — उनकी ; — परस्पर भिन्नता ; — इस प्रकार ; — ईश्वर की इच्छा के भेद से ; — वे ; — और ; — विज्ञानाकल — शुद्ध ज्ञान में पृथक् स्थित

यद्यपि उनके एकमात्र लक्षण बोध में एकता है, फिर भी ईश्वर की इच्छा के भेद से उनमें परस्पर भिन्नता है; और वे विज्ञानाकल (शुद्ध ज्ञान में पृथक् स्थित) हैं।