बोधैकलक्षणैक्ये ऽपि तेषाम् अन्योन्यभिन्नता
तथेश्वरेच्छाभेदेन ते च विज्ञानकेवलाः ॥७॥
bodhaikalakṣaṇaikye 'pi teṣām anyonyabhinnatā
tatheśvarecchābhedena te ca vijñānakevalāḥ
— (यद्यपि उनके) एकमात्र लक्षण बोध में एकता है; — भी; — उनकी; — परस्पर भिन्नता; — इस प्रकार; — ईश्वर की इच्छा के भेद से; — वे; — और; — विज्ञानाकल — शुद्ध ज्ञान में पृथक् स्थित
यद्यपि उनके एकमात्र लक्षण बोध में एकता है, फिर भी ईश्वर की इच्छा के भेद से उनमें परस्पर भिन्नता है; और वे विज्ञानाकल (शुद्ध ज्ञान में पृथक् स्थित) हैं।