Verses on the Recognition of the Lord· 14.10 / 20

Verses on the Recognition of the Lord14.10

14.10
देवादीनां च सर्वेषां भविनां त्रिविधं मलम् तत्रापि कार्मम् एवैकम् मुख्यं संसारकारणम् ॥१०॥
devādīnāṃ ca sarveṣāṃ bhavināṃ trividhaṃ malam tatrāpi kārmam evaikam mukhyaṃ saṃsārakāraṇam
— देव आदि के ; — और ; — समस्त ; — संसारी (संसरणशील) प्राणियों के ; — त्रिविध, तीन प्रकार का ; — मल (है) ; — उनमें भी ; — कार्म ही ; — एकमात्र ; — मुख्य, प्रधान ; — संसार का कारण

और देव आदि समस्त संसारी प्राणियों के लिए मल त्रिविध (तीन प्रकार का) है; उनमें भी कार्म ही एकमात्र मुख्य संसार का कारण है।