bhinnavedyaprathātraiva māyākhyaṃ janmabhogadam
kartary abodhe kārmaṃ tu māyāśaktyaiva tat trayam
— भिन्न वेद्यों (विषयों) रूप में प्रथन (फैलाव); — यहाँ (इस सन्दर्भ में); — मायीय (मल) कहलाने वाला; — जन्म और भोग देने वाला; — कर्ता में; — अबोध (अज्ञ कर्ता में); — कार्म (मल); — किन्तु; — माया-शक्ति से ही; — वह त्रय (तीन मल)
भिन्न वेद्यों (विषयों) रूप में प्रथन (फैलाव), जो यहाँ मायीय (मल) कहलाता है, जन्म और भोग देने वाला है; और अबोध कर्ता में जो (मल) है वह कार्म (मल) है; वह त्रय (तीन मल) माया-शक्ति से ही (विद्यमान है)।