Verses on the Recognition of the Lord· 14.20 / 20

Verses on the Recognition of the Lord14.20

14.20
मध्योर्ध्वगाम्युदानाख्यस् तुर्यगो हुतभुङ्मयः विज्ञानाकलमन्त्रेशो व्यानो विश्वात्मकः परः ॥२०॥
madhyordhvagāmyudānākhyas turyago hutabhuṅmayaḥ vijñānākalamantreśo vyāno viśvātmakaḥ paraḥ
— मध्य (सुषुम्ना) में ऊर्ध्व जाने वाला ; — उदान नामक ; — तुर्य (चतुर्थ अवस्था) में स्थित ; — अग्नि-स्वरूप, हुतभुक्-मय ; — जिसका स्वामी विज्ञानाकल तथा मन्त्रेश है ; — व्यान (व्याप्त प्राण) ; — विश्व-स्वरूप, जिसका आत्मा विश्व है ; — परम (तुर्यातीत के अनुरूप)

मध्य (सुषुम्ना) में ऊर्ध्व जाने वाला उदान नामक (प्राण) तुर्य में स्थित, अग्नि-स्वरूप है — जिसका स्वामी विज्ञानाकल तथा मन्त्रेश है; और व्यान विश्व-स्वरूप, परम (तुर्यातीत) है।