svātmaiva sarvajantūnām eka eva maheśvaraḥ
viśvarūpo 'ham idam ity akhaṇḍāmarśabṛṃhitaḥ
— अपना आत्मा ही, स्वात्मा ही; — समस्त प्राणियों का; — एकमात्र, एक ही; — महेश्वर; — विश्व-रूप, जिसका रूप विश्व है; — 'मैं यह हूँ'; — इति — इस प्रकार; — अखण्ड विमर्श से बृंहित (पुष्ट)
समस्त प्राणियों का अपना आत्मा ही एकमात्र महेश्वर है, जिसका रूप विश्व है, जो 'मैं यह हूँ' इस अखण्ड विमर्श से बृंहित (पुष्ट) है।