— यह; — प्रमाता; — माया से अन्धा; — संसारी, संसरणशील; — कर्म से बद्ध; — जिसका ऐश्वर्य विद्या के द्वारा प्रकाशित कर दिया गया है; — चिद्घन — चित् का सघन पुंज; — मुक्त (भूत कृदन्त); — कहलाता है (कर्मवाच्य, √वच्)
यह प्रमाता, माया से अन्धा, संसारी, कर्म से बद्ध — बद्ध जीव (कहलाता है); किन्तु जब विद्या के द्वारा (उसका) ऐश्वर्य प्रकाशित कर दिया जाता है, तब चित्-घन होकर मुक्त कहलाता है।