— अपने अंगों (अवयवों) के रूप में (प्रतीत होते भावों में); — भावों के (होने पर); — प्रमाता; — कहलाता है (कर्मवाच्य, √कथ्); — पति — स्वामी, ईश्वर; — माया से; — भिन्न (भावों के होने पर); — क्लेश, कर्म आदि से कलुषित; — पशु — बद्ध जीव
जब भाव उसके अपने अंगों (अवयवों) के रूप में (प्रतीत होते हैं), तब प्रमाता 'पति' कहलाता है; और जब माया से वे भिन्न (रूप में प्रतीत होते हैं), तब क्लेश, कर्म आदि से कलुषित होकर वह 'पशु' (बद्ध जीव) है।