Verses on the Recognition of the Lord· 13.4 / 11

Verses on the Recognition of the Lord13.4

13.4
इदंभावोपपन्नानां वेद्यभूमिम् उपेयुषाम् भावानां बोधसारत्वाद् यथावस्त्ववलोकनात् ॥४॥
idaṃbhāvopapannānāṃ vedyabhūmim upeyuṣām bhāvānāṃ bodhasāratvād yathāvastvavalokanāt
— 'इदम्' (इस-पन) से युक्त (भावों) के ; — ज्ञेय की भूमि को ; — प्राप्त हुए (भावों) के (परोक्ष भूत कृदन्त) ; — भावों के ; — (उनका) सार बोध (चैतन्य) होने के कारण ; — उन्हें यथार्थ रूप में देखने से

'इदम्' (इस-पन) से युक्त, ज्ञेय की भूमि को प्राप्त उन भावों को — क्योंकि उनका सार बोध (चैतन्य) है, और उन्हें यथार्थ रूप में देखने से (सद्विद्या उदित होती है)।