Verses on the Recognition of the Lord· 13.3 / 11

Verses on the Recognition of the Lord13.3

13.3
ईश्वरो बहिर् उन्मेषो निमेषो ऽन्तः सदाशिवः सामानाधिकरण्यं च सद्विद्याहमिदंधियोः ॥३॥
īśvaro bahir unmeṣo nimeṣo 'ntaḥ sadāśivaḥ sāmānādhikaraṇyaṃ ca sadvidyāhamidaṃdhiyoḥ
— ईश्वर ; — बाह्य ; — उन्मेष — विस्तार, खुलना ; — निमेष — संकोच, मुँदना ; — आन्तरिक ; — सदाशिव ; — सामानाधिकरण्य — एक अधिकरण में होना ; — और ; — सद्विद्या में 'अहम्' और 'इदम्' ज्ञानों का

ईश्वर बाह्य उन्मेष (विस्तार) है, सदाशिव आन्तरिक निमेष (संकोच) है; और 'अहम्' तथा 'इदम्' इन ज्ञानों का सामानाधिकरण्य (एक अधिकरण में होना) सद्विद्या में (है)।