Verses on the Recognition of the Lord· 13.2 / 11

Verses on the Recognition of the Lord13.2

13.2
किं त्व् आन्तरदशोद्रेकात् सादाख्यं तत्त्वम् आदितः बहिर्भावपरत्वे तु परतः पारमेश्वरम् ॥२॥
kiṃ tv āntaradaśodrekāt sādākhyaṃ tattvam āditaḥ bahirbhāvaparatve tu parataḥ pārameśvaram
— किन्तु, इसके अतिरिक्त ; — आन्तरिक दशा के उद्रेक (प्राबल्य) से ; — सादाख्य (सदाशिव) नामक ; — तत्त्व ; — आदि में, पहले ; — बहिर्भाव की प्रधानता होने पर ; — किन्तु ; — तदनन्तर ; — परमेश्वर (ईश्वर) का तत्त्व

किन्तु आन्तरिक दशा के उद्रेक (प्राबल्य) से पहले 'सादाख्य' (सदाशिव) नामक तत्त्व (उदित होता है); और बहिर्भाव की प्रधानता होने पर, तदनन्तर, परमेश्वर (ईश्वर) का तत्त्व (उदित होता है)।