Verses on the Recognition of the Lord· 13.1 / 11

Verses on the Recognition of the Lord13.1

13.1
एवम् अन्तर्बहिर्वृत्तिः क्रिया कालक्रमानुगा मातुर् एव तदन्योन्यावियुक्ते ज्ञानकर्मणी ॥१॥
evam antarbahirvṛttiḥ kriyā kālakramānugā mātur eva tadanyonyā-viyukte jñānakarmaṇī
— इस प्रकार ; — भीतर और बाहर प्रवृत्त होने वाली ; — क्रिया ; — काल-क्रम का अनुगमन करने वाली ; — प्रमाता की ही ; — वह, उसके ; — परस्पर अवियुक्त (अविभाज्य) (द्विवचन) ; — ज्ञान और क्रिया (द्विवचन)

इस प्रकार भीतर और बाहर प्रवृत्त होने वाली, काल-क्रम का अनुगमन करने वाली क्रिया प्रमाता की ही है; और (उसके) ज्ञान और क्रिया परस्पर अवियुक्त (अविभाज्य) हैं।