Verses on the Recognition of the Lord· 12.21 / 21

Verses on the Recognition of the Lord12.21

12.21
इत्थं तथा घटपटाद्याभासजगदात्मना तिष्ठासोर् एवम् इच्छैव हेतुता कर्तृता क्रिया ॥२१॥
itthaṃ tathā ghaṭapaṭā-dyābhāsajagadātmanā tiṣṭhāsor evam icchaiva hetutā kartṛtā kriyā
— इस प्रकार ; — उसी प्रकार ; — घट, पट आदि के आभास रूप जगत् के रूप में ; — (उस रूप में) स्थित रहने की इच्छा वाले (ईश्वर) का (इच्छार्थक विशेषण) ; — इस प्रकार ; — (उसकी) इच्छा ही ; — हेतुता (कारणता है) ; — कर्तृता ; — क्रिया

इस प्रकार घट, पट आदि के आभास रूप जगत् के रूप में स्थित रहने की इच्छा रखने वाले (ईश्वर) की वही इच्छा ही हेतुता (कारणता), कर्तृता और क्रिया है।