Verses on the Recognition of the Lord· 12.20 / 21

Verses on the Recognition of the Lord12.20

12.20
वास्तवे ऽपि चिदेकत्वे न स्याद् आभासभिन्नयोः चिकीर्षालक्षणैकत्वपरामर्शं विना क्रिया ॥२०॥
vāstave 'pi cidekatve na syād ābhāsabhinnayoḥ cikīrṣālakṣaṇaikatvaparāmarśaṃ vinā kriyā
— वास्तविक ; — भी ; — चित् की एकता होने पर ; — नहीं हो सकती (विधि, √अस्) ; — आभास रूप से भिन्न दोनों (कारक) की ; — चिकीर्षा (करने की इच्छा) रूप लक्षण वाले एकता के परामर्श (को) ; — बिना ; — क्रिया

चित् की वास्तविक एकता होने पर भी, आभास रूप से भिन्न दोनों (कारक) की क्रिया चिकीर्षा (करने की इच्छा) रूप लक्षण वाले एकता के परामर्श के बिना नहीं हो सकती।