Verses on the Recognition of the Lord· 12.19 / 21

Verses on the Recognition of the Lord12.19

12.19
न च युक्तं जडस्यैवं भेदाभेदविरोधतः आभासभेदाद् एकत्र चिदात्मनि तु युज्यते ॥१९॥
na ca yuktaṃ jaḍasyaivaṃ bhedābhedavirodhataḥ ābhāsabhedād ekatra cidātmani tu yujyate
— और नहीं ; — युक्त, सम्भव (भूत कृदन्त) ; — जड़ के लिए ; — इस प्रकार ; — भेद-अभेद के विरोध के कारण ; — आभास-भेद से ; — एक (में) ; — चित्-स्वरूप (में) ; — किन्तु ; — युक्त (सम्भव) होता है (कर्मवाच्य, √युज्)

और यह जड़ के लिए युक्त नहीं है, क्योंकि (उसमें) भेद-अभेद का विरोध होगा; किन्तु एक चित्-स्वरूप (प्रमाता) में आभास-भेद के कारण यह युक्त (सम्भव) होता है।