न च युक्तं जडस्यैवं भेदाभेदविरोधतः
आभासभेदाद् एकत्र चिदात्मनि तु युज्यते ॥१९॥
na ca yuktaṃ jaḍasyaivaṃ bhedābhedavirodhataḥ
ābhāsabhedād ekatra cidātmani tu yujyate
— और नहीं; — युक्त, सम्भव (भूत कृदन्त); — जड़ के लिए; — इस प्रकार; — भेद-अभेद के विरोध के कारण; — आभास-भेद से; — एक (में); — चित्-स्वरूप (में); — किन्तु; — युक्त (सम्भव) होता है (कर्मवाच्य, √युज्)
और यह जड़ के लिए युक्त नहीं है, क्योंकि (उसमें) भेद-अभेद का विरोध होगा; किन्तु एक चित्-स्वरूप (प्रमाता) में आभास-भेद के कारण यह युक्त (सम्भव) होता है।