मातैव कारणं तेन स चाभासद्वयस्थितौ
कार्यस्य स्थित एवैकस् तद् एकस्य क्रियोदिता ॥७॥
mātaiva kāraṇaṃ tena sa cābhāsadvayasthitau
kāryasya sthita evaikas tad ekasya kriyoditā
— प्रमाता ही; — कारण (है); — इसलिए; — वह; — और; — दो आभासों (कारण-कार्य) की स्थिति में; — कार्य का; — एक ही रहता है (भूत कृदन्त); — एक; — इसलिए; — एक (प्रमाता) की; — क्रिया कही गई (भूत कृदन्त)
प्रमाता ही कारण है; इसलिए वह, कार्य के दो आभासों (कारण और कार्य) की स्थिति में, एक ही रहता है; इस कारण क्रिया एक (प्रमाता) की कही गई है।