Verses on the Recognition of the Lord· 12.7 / 21

Verses on the Recognition of the Lord12.7

12.7
मातैव कारणं तेन स चाभासद्वयस्थितौ कार्यस्य स्थित एवैकस् तद् एकस्य क्रियोदिता ॥७॥
mātaiva kāraṇaṃ tena sa cābhāsadvayasthitau kāryasya sthita evaikas tad ekasya kriyoditā
— प्रमाता ही ; — कारण (है) ; — इसलिए ; — वह ; — और ; — दो आभासों (कारण-कार्य) की स्थिति में ; — कार्य का ; — एक ही रहता है (भूत कृदन्त) ; — एक ; — इसलिए ; — एक (प्रमाता) की ; — क्रिया कही गई (भूत कृदन्त)

प्रमाता ही कारण है; इसलिए वह, कार्य के दो आभासों (कारण और कार्य) की स्थिति में, एक ही रहता है; इस कारण क्रिया एक (प्रमाता) की कही गई है।