bahis tasyaiva tatkāryaṃ yad anta yad apekṣayā
pramātrapekṣayā coktā dvayī bāhyāntarasthitiḥ
— बाह्य; — उसी (प्रमाता) का; — उसका वह कार्य; — जो आन्तरिक (है); — जिसकी अपेक्षा से; — प्रमाता की अपेक्षा से; — और; — कही जाती है (भूत कृदन्त); — द्विविध, दो प्रकार की; — बाह्य और आन्तरिक स्थिति
जो उसी (प्रमाता) का बाह्य कार्य है, वह जिसकी अपेक्षा से (कहा जाता है) उसकी अपेक्षा से आन्तरिक है; इस प्रकार प्रमाता की अपेक्षा से उसकी द्विविध — बाह्य और आन्तरिक — स्थिति कही जाती है।