Verses on the Recognition of the Lord· 12.5 / 21

Verses on the Recognition of the Lord12.5

12.5
एवम् एका क्रिया सैषा सक्रमान्तर्बहिःस्थितिः एकस्यैवोभयाकारसहिष्णोर् अपपादिता ॥५॥
evam ekā kriyā saiṣā sakramāntarbahiḥsthitiḥ ekasyaivobhayākārasahiṣṇor apapāditā
— इस प्रकार ; — एक ; — क्रिया ; — यही (क्रिया) ; — जिसकी क्रमयुक्त स्थिति भीतर और बाहर है ; — एक (ईश्वर) की ही ; — दोनों आकारों (भीतरी-बाहरी) को सहन करने वाले की ; — सिद्ध की गई, स्थापित (भूत कृदन्त)

इस प्रकार यह एक क्रिया, जिसकी क्रमयुक्त स्थिति भीतर और बाहर है, उस एक (ईश्वर) की ही सिद्ध की गई है, जो दोनों आकारों (भीतरी-बाहरी) को सहन करने में समर्थ है।