Verses on the Recognition of the Lord· 12.4 / 21

Verses on the Recognition of the Lord12.4

12.4
कार्यकारणता लोके सान्तर्विपरिवर्तिनः उभयेन्द्रियवेद्यत्वं तस्य कस्यापि शक्तितः ॥४॥
kāryakāraṇatā loke sāntarviparivartinaḥ ubhayendriyavedyatvaṃ tasya kasyāpi śaktitaḥ
— कार्य-कारणता ; — लोक में (व्यवहार में) ; — वह (कार्य-कारणता) ; — भीतर परिवर्तन से गुजरने वाले की ; — दोनों इन्द्रियों से वेद्य होना ; — उसका ; — किसी (एक तत्त्व) का ; — (ईश्वर की) शक्ति से

लोक में कार्य-कारणता उसी की होती है जो भीतर परिवर्तन से गुजरता है; और किसी (एक तत्त्व) की दोनों इन्द्रियों से वेद्यता (ईश्वर की) शक्ति से (होती है)।