यद् असत् तद् असद्युक्ता नासतः सत्स्वरूपता
सतो ऽपि न पुनः सत्तालाभेनार्थो ऽथ चोच्यते ॥३॥
yad asat tad asadyuktā nāsataḥ satsvarūpatā
sato 'pi na punaḥ sattā-lābhenārtho 'tha cocyate
— जो असत् है; — वह; — असत् से युक्त; — नहीं (है); — असत् की; — सत्-स्वरूपता (सत् बन जाना); — सत् की; — भी; — फिर नहीं (कोई); — सत्ता की प्राप्ति से; — प्रयोजन; — और फिर भी; — कहा जाता है (कुछ लोगों द्वारा) (कर्मवाच्य, √वच्)
जो असत् है वह असत् से ही युक्त रहता है; असत् को सत्-स्वरूपता प्राप्त नहीं होती; और सत् को भी सत्ता प्राप्त करने में कोई प्रयोजन नहीं — और फिर भी (कुछ लोग ऐसी कार्य-उत्पत्ति) कहते हैं।