Verses on the Recognition of the Lord· 12.2 / 21

Verses on the Recognition of the Lord12.2

12.2
जडस्य तु न सा शक्तिः सत्ता यद् असतः सतः कर्तृकर्मत्वतत्त्वैव कार्यकारणता ततः ॥२॥
jaḍasya tu na sā śaktiḥ sattā yad asataḥ sataḥ kartṛkarmatvatattvaiva kāryakāraṇatā tataḥ
— जड़ की ; — किन्तु ; — नहीं ; — वह शक्ति ; — सत्ता — अस्तित्व प्रदान करना ; — जो (कि), अर्थात् ; — असत् का ; — सत् का (असत् को सत् बनाना) ; — जिसका स्वरूप ही कर्तृत्व और कर्मत्व है ; — कार्य-कारणता ; — इसलिए, अतः

किन्तु जड़ में वह शक्ति नहीं है — सत्ता (अस्तित्व प्रदान करना), अर्थात् असत् को सत् बनाना; इसलिए कार्य-कारणता, जिसका स्वरूप ही कर्तृत्व और कर्मत्व है, (ईश्वर की ही है)।