जडस्य तु न सा शक्तिः सत्ता यद् असतः सतः
कर्तृकर्मत्वतत्त्वैव कार्यकारणता ततः ॥२॥
jaḍasya tu na sā śaktiḥ sattā yad asataḥ sataḥ
kartṛkarmatvatattvaiva kāryakāraṇatā tataḥ
— जड़ की; — किन्तु; — नहीं; — वह शक्ति; — सत्ता — अस्तित्व प्रदान करना; — जो (कि), अर्थात्; — असत् का; — सत् का (असत् को सत् बनाना); — जिसका स्वरूप ही कर्तृत्व और कर्मत्व है; — कार्य-कारणता; — इसलिए, अतः
किन्तु जड़ में वह शक्ति नहीं है — सत्ता (अस्तित्व प्रदान करना), अर्थात् असत् को सत् बनाना; इसलिए कार्य-कारणता, जिसका स्वरूप ही कर्तृत्व और कर्मत्व है, (ईश्वर की ही है)।