Verses on the Recognition of the Lord· 11.9 / 17

Verses on the Recognition of the Lord11.9

11.9
सा तु देशादिकाध्यक्षन्तरभिन्ने स्वलक्षणे तात्कालिकी प्रवृत्तिः स्याद् अर्थिनो ऽप्य् अनुमानतः ॥९॥
sā tu deśādikādhyakṣa-ntarabhinne svalakṣaṇe tātkālikī pravṛttiḥ syād arthino 'py anumānataḥ
— वह (अर्थक्रिया/प्रवृत्ति) ; — किन्तु ; — देश आदि के पृथक् प्रत्यक्ष से विभक्त (स्वलक्षण में) ; — स्वलक्षण के विषय में ; — तात्कालिक (उस क्षण की) ; — प्रवृत्ति — सक्रिय व्यापार ; — हो (विधि, √अस्) ; — अर्थी (प्रयोजन के अभिलाषी) के लिए ; — भी ; — अनुमान से

किन्तु देश आदि के पृथक् प्रत्यक्ष से विभक्त स्वलक्षण के विषय में, अर्थी (प्रयोजन के अभिलाषी) के लिए वह तात्कालिक (उस क्षण की) प्रवृत्ति अनुमान से भी हो सकती है।