Verses on the Recognition of the Lord· 1.4 / 5

Verses on the Recognition of the Lord1.4

1.4
तथा हि जडभूतानां प्रतिष्ठा जीवदाश्रया ज्ञानं क्रिया च भूतानां जीवतां जीवनं मतम् ॥४॥
tathā hi jaḍabhūtānāṃ pratiṣṭhā jīvadāśrayā jñānaṃ kriyā ca bhūtānāṃ jīvatāṃ jīvanaṃ matam
— क्योंकि, इस प्रकार ; — जड़ पदार्थों की ; — प्रतिष्ठा — सत्ता, स्थापित अस्तित्व ; — जीवित प्राणी पर आश्रित ; — ज्ञान ; — क्रिया ; — और ; — प्राणियों का ; — जीवित (प्राणियों) का ; — जीवन ; — माना गया है

क्योंकि जड़ पदार्थों की प्रतिष्ठा (सत्ता) जीवित प्राणी पर आश्रित है; और ज्ञान तथा क्रिया ही जीवित प्राणियों का जीवन माना गया है।