तथा हि जडभूतानां प्रतिष्ठा जीवदाश्रया
ज्ञानं क्रिया च भूतानां जीवतां जीवनं मतम् ॥४॥
tathā hi jaḍabhūtānāṃ pratiṣṭhā jīvadāśrayā
jñānaṃ kriyā ca bhūtānāṃ jīvatāṃ jīvanaṃ matam
— क्योंकि, इस प्रकार; — जड़ पदार्थों की; — प्रतिष्ठा — सत्ता, स्थापित अस्तित्व; — जीवित प्राणी पर आश्रित; — ज्ञान; — क्रिया; — और; — प्राणियों का; — जीवित (प्राणियों) का; — जीवन; — माना गया है
क्योंकि जड़ पदार्थों की प्रतिष्ठा (सत्ता) जीवित प्राणी पर आश्रित है; और ज्ञान तथा क्रिया ही जीवित प्राणियों का जीवन माना गया है।