Verses on the Recognition of the Lord· 1.3 / 5

Verses on the Recognition of the Lord1.3

1.3
किं तु मोहवशाद् अस्मिन् दृष्टे ऽप्य् अनुपलक्षिते शक्त्याविष्करणेनेयं प्रत्यभिज्ञोपदर्श्यते ॥३॥
kiṃ tu mohavaśād asmin dṛṣṭe 'py anupalakṣite śaktyāviṣkaraṇeneyaṃ pratyabhijñopadarśyate
— किन्तु, परन्तु ; — मोह के वश से ; — इस (ईश्वर) में ; — देखे जाने पर (भी) ; — भी, यद्यपि ; — (भलीभाँति) पहचाना न जाने पर, अलक्षित ; — शक्तियों के प्रकटीकरण द्वारा ; — यह ; — प्रत्यभिज्ञा ; — उपदर्श्यते — दिखलाई जाती है (कर्मवाच्य)

किन्तु मोह के वश से वह (ईश्वर) देखे जाने पर भी (भलीभाँति) पहचाना नहीं जाता; इसलिए उसकी शक्तियों के प्रकटीकरण द्वारा यह प्रत्यभिज्ञा दिखलाई जाती है।