अपरेयमितस्त्वन्यां प्रकृतिं विद्धि मे पराम् ।
जीवभूतां महाबाहो ययेदं धार्यते जगत् ॥
७-५ ॥
apareyamitastvanyāṃ prakṛtiṃ viddhi me parām |
jīvabhūtāṃ mahābāho yayedaṃ dhāryate jagat ||
7-5 ||
यह तो मेरी अपरा (निम्न) प्रकृति है; किन्तु हे महाबाहु, इससे भिन्न मेरी दूसरी परा (श्रेष्ठ) प्रकृति को जान, जो जीव-स्वरूप है और जिससे यह जगत् धारण किया जाता है।