Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 7.6 / 30

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)7.6

7.6
एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय । अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा ॥ ७-६ ॥
etadyonīni bhūtāni sarvāṇītyupadhāraya | ahaṃ kṛtsnasya jagataḥ prabhavaḥ pralayastathā || 7-6 ||
— इन दोनों को योनि वाले भूत ; — सब — ऐसा समझ ; — मैं समस्त जगत् का ; — प्रभव और वैसे ही प्रलय

ऐसा समझ कि समस्त भूतों की योनि (उत्पत्ति-स्थान) ये दोनों हैं; मैं समस्त जगत् का प्रभव (उद्गम) हूँ और वैसे ही प्रलय भी।