वीतरागभयक्रोधा मन्मया मद्व्यपाश्रयाः ।
बहवो ज्ञानतपसा पूता मद्भावमागताः ॥
४-१० ॥
vītarāgabhayakrodhā manmayā madvyapāśrayāḥ |
bahavo jñānatapasā pūtā madbhāvamāgatāḥ ||
4-10 ||
राग, भय और क्रोध से रहित, मुझमें तन्मय, मेरे आश्रित बहुत-से लोग ज्ञान-रूपी तप से पवित्र होकर मेरे भाव को प्राप्त हो चुके हैं।