Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 4.11 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)4.11

4.11
ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् । मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥ ४-११ ॥
ye yathā māṃ prapadyante tāṃstathaiva bhajāmyaham | mama vartmānuvartante manuṣyāḥ pārtha sarvaśaḥ || 4-11 ||
— जो जिस प्रकार मेरी शरण में आते हैं ; — मैं उन्हें उसी प्रकार फल देता हूँ ; — मेरे मार्ग का अनुसरण करते हैं ; — मनुष्य, हे पार्थ, सब प्रकार से

जो जिस प्रकार मेरी शरण में आते हैं, मैं उन्हें उसी प्रकार फल देता हूँ; हे पार्थ, मनुष्य सब प्रकार से मेरे ही मार्ग का अनुसरण करते हैं।