Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 4.9 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)4.9

4.9
जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वतः । त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन ॥ ४-९ ॥
janma karma ca me divyamevaṃ yo vetti tattvataḥ | tyaktvā dehaṃ punarjanma naiti māmeti so'rjuna || 4-9 ||
— मेरे जन्म और कर्म दिव्य हैं ; — इस प्रकार जो तत्त्व से जानता है ; — शरीर त्यागकर पुनर्जन्म को ; — वह नहीं पाता, मुझे प्राप्त होता है, हे अर्जुन

हे अर्जुन, इस प्रकार जो मेरे दिव्य जन्म और कर्म को तत्त्व से जानता है, वह शरीर त्यागकर पुनर्जन्म को प्राप्त नहीं होता, बल्कि मुझे ही प्राप्त होता है।