Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.39 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.39

3.39
एष सूक्ष्मः परः शत्रुर्देहिनामिन्द्रियैः सह । सुखतन्त्र इवासीनो मोहयन्पार्थ तिष्ठति ॥ ३-३९ ॥
eṣa sūkṣmaḥ paraḥ śatrurdehināmindriyaiḥ saha | sukhatantra ivāsīno mohayanpārtha tiṣṭhati || 3-39 ||
— यह सूक्ष्म, परम शत्रु ; — देहधारियों की इन्द्रियों के साथ ; — सुख में रत-सा बैठकर ; — मोहित करता हुआ, हे पार्थ, स्थित रहता है

हे पार्थ, यह सूक्ष्म और परम शत्रु देहधारियों की इन्द्रियों के साथ रहता है; सुख में रत-सा बैठकर वह उन्हें मोहित करता हुआ स्थित रहता है।