Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.40 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.40

3.40
कामक्रोधमयो घोरः स्तम्भहर्षसमुद्भवः । अहङ्कारोऽभिमानात्मा दुस्तरः पापकर्मभिः ॥ ३-४० ॥
kāmakrodhamayo ghoraḥ stambhaharṣasamudbhavaḥ | ahaṅkāro'bhimānātmā dustaraḥ pāpakarmabhiḥ || 3-40 ||
— काम-क्रोधमय, घोर ; — जड़ता और हर्ष से उत्पन्न ; — अभिमान-स्वरूप अहंकार ; — पापकर्मों के द्वारा दुस्तर

काम और क्रोध से युक्त, घोर, जड़ता और हर्ष से उत्पन्न, अभिमान-स्वरूप अहंकार पापकर्मों के द्वारा दुस्तर है।