Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 11.46 / 60

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.46

11.46
तस्मात्प्रणम्य प्रणिधाय कायं प्रसादये त्वामहमीशमीढ्यम् । पितेव पुत्रस्य सखेव सख्युः प्रियः प्रियास्यार्हसि देव सोढुम् ॥ ११-४६ ॥
tasmātpraṇamya praṇidhāya kāyaṃ prasādaye tvāmahamīśamīḍhyam | piteva putrasya sakheva sakhyuḥ priyaḥ priyāsyārhasi deva soḍhum || 11-46 ||
— अतः प्रणाम करके, शरीर को झुकाकर ; — मैं आप स्तुति योग्य ईश को प्रसन्न करता हूँ ; — जैसे पिता पुत्र को, सखा सखा को ; — प्रिय प्रिय को, वैसे आप मुझे सहन करें, हे देव

अतः शरीर को झुकाकर प्रणाम करके मैं आप स्तुति योग्य ईश को प्रसन्न करता हूँ; हे देव, जैसे पिता पुत्र को, सखा सखा को, और प्रिय अपने प्रिय को सहता है, वैसे ही आप मुझे सहन करने योग्य हैं।