Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 11.31 / 60

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.31

11.31
लेलिह्यसे ग्रसमानः समन्ता ल्लोकान्समग्रान्वदनैर्ज्वलद्भिः । तेजोभिरापूर्य जगत्समग्रं भास स्तवोग्राः प्रतपन्ति विष्णो ॥ ११-३१ ॥
lelihyase grasamānaḥ samantā llokānsamagrānvadanairjvaladbhiḥ | tejobhirāpūrya jagatsamagraṃ bhāsa stavogrāḥ pratapanti viṣṇo || 11-31 ||
— आप चाटते हैं, सब ओर ग्रसते हुए ; — समस्त लोकों को प्रज्वलित मुखों से ; — तेज से समस्त जगत् को भरकर ; — आपकी उग्र प्रभाएँ तपाती हैं, हे विष्णु

हे विष्णु, आप प्रज्वलित मुखों से सब ओर के समस्त लोकों को ग्रसते हुए चाटते हैं; अपने तेज से समस्त जगत् को भरकर आपकी उग्र प्रभाएँ इसे तपाती हैं।