लेलिह्यसे ग्रसमानः समन्ता ल्लोकान्समग्रान्वदनैर्ज्वलद्भिः ।
तेजोभिरापूर्य जगत्समग्रं भास स्तवोग्राः प्रतपन्ति विष्णो ॥
११-३१ ॥
lelihyase grasamānaḥ samantā llokānsamagrānvadanairjvaladbhiḥ |
tejobhirāpūrya jagatsamagraṃ bhāsa stavogrāḥ pratapanti viṣṇo ||
11-31 ||
हे विष्णु, आप प्रज्वलित मुखों से सब ओर के समस्त लोकों को ग्रसते हुए चाटते हैं; अपने तेज से समस्त जगत् को भरकर आपकी उग्र प्रभाएँ इसे तपाती हैं।