तथा तवामी नरलोकवीरा विशन्ति वक्त्राण्यभितो ज्वलन्ति ।
यथा प्रदीप्तं ज्वलनं पतङ्गा विशन्ति नाशाय समृद्धवेगाः ।
तथैव नाशाय विशन्ति लोका स्तवापि वक्त्राणि समृद्धवेगाः ॥
११-३० ॥
tathā tavāmī naralokavīrā viśanti vaktrāṇyabhito jvalanti |
yathā pradīptaṃ jvalanaṃ pataṅgā viśanti nāśāya samṛddhavegāḥ |
tathaiva nāśāya viśanti lokā stavāpi vaktrāṇi samṛddhavegāḥ ||
11-30 ||
वैसे ही ये नरलोक के वीर सब ओर प्रज्वलित आपके मुखों में प्रवेश करते हैं; जैसे पतंगे प्रज्वलित अग्नि में बढ़े हुए वेग से नाश के लिए प्रवेश करते हैं, वैसे ही ये लोक भी बढ़े हुए वेग से आपके मुखों में नाश के लिए प्रवेश करते हैं।