त्वत्तेजसा निहता नूनमेते तथाहीमे त्वच्छरीरे प्रविष्टाः ।
यथा नदीनां बहवोऽम्बुवेगाः समुद्रमेवाभिमुखा वज्रन्ति ॥
११-२९ ॥
tvattejasā nihatā nūnamete tathāhīme tvaccharīre praviṣṭāḥ |
yathā nadīnāṃ bahavo'mbuvegāḥ samudramevābhimukhā vajranti ||
11-29 ||
निश्चय ही ये आपके तेज से मारे हुए आपके शरीर में प्रवेश कर रहे हैं, जैसे नदियों के अनेक जलप्रवाह समुद्र के ही अभिमुख होकर बहते हैं।