Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 11.29 / 60

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.29

11.29
त्वत्तेजसा निहता नूनमेते तथाहीमे त्वच्छरीरे प्रविष्टाः । यथा नदीनां बहवोऽम्बुवेगाः समुद्रमेवाभिमुखा वज्रन्ति ॥ ११-२९ ॥
tvattejasā nihatā nūnamete tathāhīme tvaccharīre praviṣṭāḥ | yathā nadīnāṃ bahavo'mbuvegāḥ samudramevābhimukhā vajranti || 11-29 ||
— आपके तेज से निश्चय ही मारे ये ; — वैसे ही आपके शरीर में प्रवेश करते हैं ; — जैसे नदियों के अनेक जलप्रवाह ; — समुद्र के ही अभिमुख बहते हैं

निश्चय ही ये आपके तेज से मारे हुए आपके शरीर में प्रवेश कर रहे हैं, जैसे नदियों के अनेक जलप्रवाह समुद्र के ही अभिमुख होकर बहते हैं।