Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 11.28 / 60

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.28

11.28
नानारूपैः पुरुषैर्बाध्यमाना विशन्ति ते वक्त्रमचिन्त्यरूपम् । यौधिष्ठिरा धार्तराष्ट्राश्च योधाः शस्त्रैः कृत्ता विविधैः सर्व एव ॥ ११-२८ ॥
nānārūpaiḥ puruṣairbādhyamānā viśanti te vaktramacintyarūpam | yaudhiṣṭhirā dhārtarāṣṭrāśca yodhāḥ śastraiḥ kṛttā vividhaiḥ sarva eva || 11-28 ||
— नाना रूप वाले योद्धाओं से पीड़ित ; — आपके अचिन्त्यरूप मुख में प्रवेश करते हैं ; — युधिष्ठिर के और धृतराष्ट्र के योद्धा ; — अनेक शस्त्रों से कटे, सब के सब

नाना रूप वाले योद्धाओं से पीड़ित होते हुए वे आपके अचिन्त्यरूप मुख में प्रवेश करते हैं; युधिष्ठिर के पक्ष के और धृतराष्ट्र के पक्ष के योद्धा, अनेक शस्त्रों से कटे हुए, सब के सब।