The Great Liberation Tantra· 1.35 / 72

The Great Liberation Tantra1.35

1.35
ततोऽपि द्वापरे प्राप्ते स्मृत्युक्तसुकृतोज्झिते । धमार्द्धलोपे मनुजे आधिव्याधिसमाकुले । संहिताद्युपदेशेन त्वयैवोद्धारिता नराः ॥३५॥
tato'pi dvāpare prāpte smṛtyuktasukṛtojjhite | dhamārddhalope manuje ādhivyādhisamākule | saṃhitādyupadeśena tvayaivoddhāritā narāḥ ||35||
— उसके पश्चात् ; — भी ; — द्वापर में ; — आने पर ; — स्मृति में कहे सुकृत के त्याग जाने पर ; — धर्म के आधे लुप्त होने पर ; — मनुष्य में ; — आधि-व्याधि से व्याकुल होने पर ; — संहिता आदि के उपदेश से ; — तुम्हारे ही द्वारा ; — उद्धृत किए गए ; — मनुष्य

उसके पश्चात् द्वापर के आने पर — जब स्मृति में कहे गए सुकृत त्याग दिए गए, धर्म आधा लुप्त हो गया, और मनुष्य आधि-व्याधि से व्याकुल हो गए — तब संहिता आदि के उपदेश से आपने ही मनुष्यों का उद्धार किया।