विनाऽज्ञया मया किञ्चिद्भाषितुं नैव शक्यते ।
कृपावलेशो मयि चेत् स्नेहोऽस्ति यदि मां प्रति ।
तदा निवेद्यते किञ्चिन्मनसा यद्विचारितम् ॥१२॥
vinā'jñayā mayā kiñcidbhāṣituṃ naiva śakyate |
kṛpāvaleśo mayi cet sneho'sti yadi māṃ prati |
tadā nivedyate kiñcinmanasā yadvicāritam ||12||
— बिना; — आज्ञा के, अनुमति के; — मुझसे; — कुछ भी; — कहने के लिए; — नहीं ही; — सम्भव है, हो सकता; — कृपा का लेश; — मुझ पर; — यदि; — स्नेह; — है; — यदि; — मुझ; — प्रति; — तब; — निवेदित किया जाता है; — कुछ; — मन से; — जो विचार किया है
आपकी आज्ञा के बिना मैं कुछ भी कह नहीं सकती। यदि मुझ पर थोड़ी भी कृपा है, यदि मेरे प्रति स्नेह है, तो मैं अपने मन में जो विचार किया है, उसे निवेदित करूँ।