The Great Liberation Tantra· 1.11 / 72

The Great Liberation Tantra1.11

1.11
श्रीपार्वत्युवाच । देवदेव जगन्नाथ मन्नाथ करुणानिधे । त्वदधीनाऽस्मि देवेश तवाऽज्ञाकारिणी सदा ॥११॥
śrīpārvatyuvāca | devadeva jagannātha mannātha karuṇānidhe | tvadadhīnā'smi deveśa tavā'jñākāriṇī sadā ||11||
— श्रीपार्वती ने कहा ; — हे देवों के देव ; — हे जगन्नाथ ; — हे मेरे नाथ ; — हे करुणानिधि ; — तुम्हारे अधीन ; — मैं हूँ ; — हे देवेश ; — तुम्हारी ; — आज्ञा का पालन करने वाली ; — सदा

श्रीपार्वती ने कहा — हे देवों के देव, हे जगन्नाथ, हे मेरे नाथ, हे करुणानिधि, हे देवेश, मैं आपके अधीन हूँ और सदा आपकी आज्ञा का पालन करने वाली हूँ।