The Great Liberation Tantra· 1.13 / 72

The Great Liberation Tantra1.13

1.13
त्वदन्यः संशयस्याऽस्य कस्त्रिलोक्यां महेश्वर । छेत्ता भवितुमर्हो वा सर्वज्ञः सर्वशास्त्रवित् ॥१३॥
tvadanyaḥ saṃśayasyā'sya kastrilokyāṃ maheśvara | chettā bhavitumarho vā sarvajñaḥ sarvaśāstravit ||13||
— तुमसे अन्य ; — संशय का ; — इस ; — कौन ; — तीनों लोकों में ; — हे महेश्वर ; — छेदने वाला ; — होने के लिए ; — योग्य ; — अथवा ; — सर्वज्ञ ; — समस्त शास्त्रों का ज्ञाता

हे महेश्वर, आपको छोड़कर तीनों लोकों में और कौन है जो इस संशय को छेदने में समर्थ हो — जो सर्वज्ञ और समस्त शास्त्रों का ज्ञाता हो?