The Great Liberation Tantra· 1.14 / 72

The Great Liberation Tantra1.14

1.14
श्रीसदाशिव उवाच । किमुच्यते महाप्राज्ञे कथ्यतां प्राणवल्लभे । यदकथ्यं गणेशेऽपि स्कन्दे सेनापतावपि ॥१४॥
śrīsadāśiva uvāca | kimucyate mahāprājñe kathyatāṃ prāṇavallabhe | yadakathyaṃ gaṇeśe'pi skande senāpatāvapi ||14||
— श्रीसदाशिव ने कहा ; — क्या ; — कहा जाए, पूछा जाए ; — हे महाप्राज्ञे ; — कहा जाए ; — हे प्राणवल्लभे ; — जो अकथ्य है ; — गणेश को ; — भी ; — स्कन्द को ; — सेनापति को ; — भी

श्रीसदाशिव ने कहा — हे महाप्राज्ञे, क्या पूछना चाहती हो? कहो, हे प्राणवल्लभे। जो गणेश को, और सेनापति स्कन्द को भी कहने योग्य नहीं —