The Essence of the Tantra· 9.43 / 53

The Essence of the Tantra9.43

9.43

तत्र यदाधिष्ठेयतया बहीरूपतया भानं तदा जाग्रदवस्था मेये मातरि माने च

Transliteration (IAST)

tatra yadādhiṣṭheyatayā bahīrūpatayā bhānaṃ tadā jāgradavasthā meye mātari māne ca

— अधिष्ठेय (अधिष्ठित होने योग्य, आधार) रूप से ; — बाह्य रूप से ; — भान — प्रतीति, प्रकाशन ; — जाग्रत्-अवस्था ; — मेय में (मापित/ज्ञेय में) ; — माता में (प्रमाता में) ; — मान में (प्रमाण में)

उसमें जब अधिष्ठेय (अधिष्ठित होने योग्य) रूप से, बाह्य रूप से भान होता है, तब जाग्रत्-अवस्था (होती है) — मेय में, माता (प्रमाता) में तथा मान (प्रमाण) में।