तृप्तस्य च अन्नादौ अवैराग्याभावे ऽपि अन्तःस्थरागानपायात्
Transliteration (IAST)
tṛptasya ca annādau avairāgyābhāve 'pi antaḥstharāgānapāyāt
और तृप्त (व्यक्ति) के अन्न आदि में अवैराग्य के अभाव होने पर भी अन्तःस्थ राग का अनपाय (निरन्तरता) रहता है।
तृप्तस्य च अन्नादौ अवैराग्याभावे ऽपि अन्तःस्थरागानपायात्
tṛptasya ca annādau avairāgyābhāve 'pi antaḥstharāgānapāyāt
और तृप्त (व्यक्ति) के अन्न आदि में अवैराग्य के अभाव होने पर भी अन्तःस्थ राग का अनपाय (निरन्तरता) रहता है।