The Essence of the Tantra· 8.52 / 93

The Essence of the Tantra8.52

8.52

तेन विना पुनर् अवैराग्यानुत्पत्तिप्रसङ्गात्

Transliteration (IAST)

tena vinā punar avairāgyānutpattiprasaṅgāt

— उस (राग) के बिना ; — अवैराग्य की अनुत्पत्ति का प्रसंग आने के कारण

क्योंकि उस (अन्तःस्थ राग) के बिना पुनः अवैराग्य की अनुत्पत्ति का प्रसंग आ जायेगा।