The Essence of the Tantra· 8.53 / 93

The Essence of the Tantra8.53

8.53

कालश् च कार्यं कलयंस् तदवच्छिन्नं कर्तृत्वम् अपि कलयति तुल्ये क्वचित्त्वे अस्मिन्न् एव कर्तृत्वम् इत्य् अत्रार्थे नियतेर् व्यापारः

Transliteration (IAST)

kālaś ca kāryaṃ kalayaṃs tadavacchinnaṃ kartṛtvam api kalayati tulye kvacittve asminn eva kartṛtvam ity atrārthe niyater vyāpāraḥ

— काल ; — कार्य को कलित करता हुआ ; — उस (कार्य) से अवच्छिन्न ; — कलित करता है, सम्पादित करता है ; — 'कहीं' के तुल्य (अविशिष्ट) रहने पर ; — नियति का व्यापार

और काल कार्य को कलित करता हुआ उस (कार्य) से अवच्छिन्न कर्तृत्व को भी कलित करता है। 'कहीं' के तुल्य (अविशिष्ट) रहने पर 'इसी में कर्तृत्व' — इस अर्थ में नियति का व्यापार है।