The Essence of the Tantra· 8.48 / 93

The Essence of the Tantra8.48

8.48

किञ्चित्कर्तृत्वं किञ्चिद्भागसिद्धये क्वचिद् एव कर्तृत्वम् इत्य् अत्र अर्थे पर्यवस्यति क्वचिद् एव च इत्य् अत्र भागे रागतत्त्वस्य व्यापारः

Transliteration (IAST)

kiñcitkartṛtvaṃ kiñcidbhāgasiddhaye kvacid eva kartṛtvam ity atra arthe paryavasyati kvacid eva ca ity atra bhāge rāgatattvasya vyāpāraḥ

— किञ्चित्-कर्तृत्व — सीमित कर्तृत्व ; — 'किञ्चित्' भाग की सिद्धि के लिए ; — 'कहीं ही कर्तृत्व' ; — पर्यवसित होता है, परिणत होता है ; — राग-तत्त्व का व्यापार

किञ्चित्-कर्तृत्व 'किञ्चित्' भाग की सिद्धि के लिए 'कहीं ही कर्तृत्व' — इस अर्थ में पर्यवसित होता है; और 'कहीं ही' इस भाग में राग-तत्त्व का व्यापार है।