The Essence of the Tantra· 8.15 / 93

The Essence of the Tantra8.15

8.15

तत्र परमेश्वरः पञ्चभिः शक्तिभिः निर्भर इत्य् उक्तम् स स्वातन्त्र्यात् शक्तिं तां तां मुख्यतया प्रकटयन् पञ्चधा तिष्ठति

Transliteration (IAST)

tatra parameśvaraḥ pañcabhiḥ śaktibhiḥ nirbhara ity uktam sa svātantryāt śaktiṃ tāṃ tāṃ mukhyatayā prakaṭayan pañcadhā tiṣṭhati

— पाँच शक्तियों से ; — निर्भर — परिपूर्ण, ओतप्रोत ; — स्वातन्त्र्य से ; — मुख्य रूप से, प्रधानता से ; — प्रकट करता हुआ ; — पाँच प्रकार से ; — स्थित रहता है

उसमें परमेश्वर पाँच शक्तियों से निर्भर (परिपूर्ण) है — ऐसा कहा गया। वह स्वातन्त्र्य से उस-उस शक्ति को मुख्य रूप से प्रकट करता हुआ पाँच प्रकार से स्थित रहता है।