The Essence of the Tantra· 6.8 / 82

The Essence of the Tantra6.8

6.8

तत्र घटिका तिथिः मासो वर्षं च वर्षसमूहात्मा इति समस्तः कालः परिसमाप्यते । तत्र सपञ्चांशे अङ्गुले चषक इति स्थित्या घटिकोदयः घटिका हि षष्ट्या चषकैः तस्मात् द्वासप्तत्यङ्गुला भवति

Transliteration (IAST)

tatra ghaṭikā tithiḥ māso varṣaṃ ca varṣasamūhātmā iti samastaḥ kālaḥ parisamāpyate | tatra sapañcāṃśe aṅgule caṣaka iti sthityā ghaṭikodayaḥ ghaṭikā hi ṣaṣṭyā caṣakaiḥ tasmāt dvāsaptatyaṅgulā bhavati

— घटिका (लगभग 24 मिनट की इकाई) ; — तिथि — चान्द्र दिवस ; — मास — महीना ; — वर्ष ; — वर्ष-समूह-रूप ; — समस्त काल ; — समाप्त (समाहित) होता है ; — सवा (एक और एक-पंचमांश) अँगुल में ; — चषक (एक लघु काल-इकाई) ; — घटिका का उदय ; — साठ चषकों से ; — बहत्तर अँगुल

उसमें घटिका, तिथि, मास तथा वर्ष-समूह-रूप वर्ष — इस प्रकार समस्त काल समाप्त (समाहित) हो जाता है। उनमें सवा (एक और एक-पंचमांश) अँगुल में एक चषक — इस स्थिति से घटिका का उदय होता है; क्योंकि घटिका साठ चषकों की होती है, अतः वह बहत्तर अँगुल की होती है।