The Essence of the Tantra· 4.34 / 46

The Essence of the Tantra4.34

4.34

यया परस्परविविक्तात्मना भेदेनैव सा अस्य श्रीमदपरशक्तिः

Transliteration (IAST)

yayā parasparaviviktātmanā bhedenaiva sā asya śrīmadaparaśaktiḥ

— परस्पर विविक्त (पृथक्) रूप से ; — भेद से ही ; — श्रीमती अपराशक्ति — अपर शक्ति

और जिसके द्वारा वह परस्पर विविक्त (पृथक्) रूप से भेद से ही (भासित करता है) — वह उसकी श्रीमती अपराशक्ति है।